खादी सिल्क के कपडे पे पहले जल रंगों से रंग भर दिया और ऊपर से कढाई कर दी.रास्तेका जो रंग है,वही कपडेका मूल रंग था.
हक़ीक़त की बंजर डगर से,
आओ ज़रा-सा हटके चलें,
चलो ,ले चलूँ हँसी नज़ारों में,
ख्वाबोंकी शत रंगी रह्गुज़रमे!
छाँव घनेरी ,धूप प्यारी सुनहरी,
दूर के उजालों की सुने सदाए,
उलझा लो दामन को सपनों से,
चले जाना जब असलियत बुलाये!
