उसी सपने को याद कर मैंने एक भित्ती चित्र बनाया...सिल्क के कपडे पे नीले,हलके गुलाबी और सफ़ेद जल रंगों से पार्श्वभूमी बना ली.रुपहले कपडेमे से चाँद काटा और सिल लिया...ऊपर से धुंद दिखाने के लिए chiffon लगा दिया.. पेड़ कढाई से बना लिए. बर्फ के लिए packing से मिली सिंथेटिक रुई टांक दी.अब के रचना पहले लिखी गयी थी...क्योंकि सपना याद आ रहा था..तसवीर साफ़ नही आयी है...क्षमा चाहती हूँ.
रानी-सी रात ने ओढी,
चाँद टंकी,चुनर श्यामली,
हिमशिखा पे उतर आयी,
चांदी-सी चमकती शुभ्र चांदनी,
सजी फिज़ाएँ,लजीली दुल्हन-सी,
मुबारक हो!क़ुदरत बलाएँ लेने लगी..
