पँछी तो कढाई से बना है. पत्तों के लिए सिल्क हरे रंग की छटाओं में रंग दिया और आकार काट के सिल दिए. घोंसला बना है,डोरियों,क्रोशिये और धागों से. पार्श्व भूमी है नीले रंग के, हाथ करघे पे बुने, रेशम की.चल उड़ जा ओ परिंदे!
तू नीड़ नया बना ले रे ,
न आयेगा अब लौट के,
इक बार जो फैले पंख रे,
जहाँ तूने खोली आँखें,
जहाँ तूने निगले दाने रे !