नुक्कड़,नुक्कड़ गधे खड़े हैं,
आगे पूजा के फूल हैं,
गलों में उनके हार हैं,
नन्हीं कलियाँ मरती हैं,
इनकी उम्र दराज़ है,
बुतों से बने बगीचे हैं,
फूल औ,परिंदे कहाँ हैं?
हरसूँ झुलसाती धूप है,
छाया का निशाँ नही है,
हाले चमन क्या होगा?
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सोमवार, 31 मई 2010
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