skip to main
|
skip to sidebar
इंसान
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
इंसान
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 6 मार्च 2010
रुत बदल दे !
पार
कर
दे
हर
सरहद
जो
दिलों
में
ला
रही
दूरियाँ
,
इन्सानसे
इंसान
तक़सीम
हो
,
खुदाने
कब
चाहा
?
लौट
के
आयेंगी
बहारें
,
जायेगी
ये
खिज़ा
,
रुत
बदल
के
देख
,
गर
,
चाहती
है
फूलना
!
मुश्किल
है
बड़ा
,
नही
काम
ये
आसाँ
,
दूर
सही
,
जानिबे
मंजिल
,
क़दम
तो
बढ़ा
!
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
फ़ॉलोअर
ब्लॉग आर्काइव
▼
2014
(4)
▼
जून
(1)
अरसा बीता..
►
अप्रैल
(1)
►
मार्च
(1)
►
फ़रवरी
(1)
►
2013
(14)
►
अक्टूबर
(1)
►
सितंबर
(2)
►
अगस्त
(4)
►
जुलाई
(4)
►
जून
(2)
►
मई
(1)
►
2012
(25)
►
दिसंबर
(3)
►
नवंबर
(1)
►
अक्टूबर
(1)
►
सितंबर
(1)
►
अगस्त
(4)
►
जुलाई
(2)
►
जून
(1)
►
मई
(2)
►
अप्रैल
(3)
►
मार्च
(2)
►
फ़रवरी
(3)
►
जनवरी
(2)
►
2011
(31)
►
दिसंबर
(2)
►
नवंबर
(3)
►
अक्टूबर
(1)
►
सितंबर
(2)
►
अगस्त
(1)
►
जुलाई
(3)
►
जून
(3)
►
मई
(2)
►
अप्रैल
(4)
►
मार्च
(3)
►
फ़रवरी
(5)
►
जनवरी
(2)
►
2010
(63)
►
दिसंबर
(3)
►
नवंबर
(2)
►
अक्टूबर
(3)
►
सितंबर
(3)
►
अगस्त
(7)
►
जुलाई
(7)
►
जून
(9)
►
मई
(9)
►
अप्रैल
(5)
►
मार्च
(8)
►
फ़रवरी
(6)
►
जनवरी
(1)
►
2009
(12)
►
दिसंबर
(1)
►
नवंबर
(3)
►
अक्टूबर
(6)
►
सितंबर
(2)
मेरे बारे में
kshama
jaan jayenge..dheere,dheere..!
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें