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शुक्रवार, 7 मई 2010
ये मौसम सुहाने .
सावन के झरने ,
बहारों के साए,
पतझड़ के पत्ते
मिले हैं आके यहाँ पे..
हम रहे न रहें,
किया है क़ैद इन्हें
तुम्हारे लिए,
ये अब जा न पायें..
भूल जाना दर्द सारे,
जो गर मैंने दिए,
साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने..
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