saaye लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
saaye लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 7 मई 2010

ये मौसम सुहाने .

 सावन  के  झरने ,
बहारों के साए,
पतझड़  के  पत्ते
मिले हैं आके यहाँ पे..

हम रहे न रहें,
किया है क़ैद इन्हें
तुम्हारे लिए,
ये अब जा न पायें..

भूल जाना दर्द सारे,
जो गर मैंने दिए,
साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने..

सोमवार, 12 अप्रैल 2010

वो वक़्त भी कैसा था.....

कुछ  रंगीन  कपडे  के  टुकड़े ,कुछ  धागे , और  कल्पना  के  रंग ...इन के मेलजोल से मैंने  बनाया है यह भित्ति चित्र...जब कभी देखती हूँ,अपना गाँव याद आ जाता है..



वो वक़्त भी कैसा था,
सुबह का सुनहरा आसमाँ,
हमेशा अपना लगता था!

तेरा हाथ हाथों में रहता,
शाम का रेशमी गुलाबी साया,
कितना पास लगता था !

रंगीन रूई से टुकड़ों में चेहरा,
खोजना  एक दूजे का,
बेहद अच्छा लगता था !

आज भी सुबह आसमाँ सुनहरा,
कुछ,कुछ रंगीन होता होगा,
जिसे अकेले देखा नही जाता....

शाम का सुरमई गुलाबी साया,
लगता है कितना सूना,सूना!
रातें गुज़रती हैं,तनहा,तनहा...