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क्षणिका
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बुधवार, 29 अगस्त 2012
ग़म का इतिहास
लंबा
गम
का
इतिहास
यहाँ
,
किश्तों
में
सुनाते
हैं
,
लो
अभी
शुरू
ही
किया
,
और
वो
उठके
चल
दिया
?
शनिवार, 30 जुलाई 2011
तलाश--एक क्षणिका...
रही तलाश इक दिए की,
ता-उम्र इस शमा को,
कभी उजाले इतने तेज़ थे,
के , दिए दिखायी ना दिए,
या जानिबे मंज़िल अंधेरे थे,
दिए जलाये ना दिए गए......
सोमवार, 28 फ़रवरी 2011
मुकम्मल जहाँ ...एक क्षणिका ...
मैंने कब मुकम्मल जहाँ माँगा?
जानती हूँ नही मिलता!
मेरी जुस्तजू ना मुमकिन नहीं !
अरे पैर रखनेको ज़मीं चाही,
माथे पर एक टुकडा आसमाँ,
पूरी दुनिया तो नही माँगी?
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011
चश्मे नम मेरे....
परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,
कि इन्हें, लमहा, लमहा,
रुला रहा है कोई.....
चाहूँ थमना चलते, चलते,
क़दम बढ्तेही जा रहें हैं,
सदाएँ दे रहा है कोई.....
अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,
तेरीही चाँदनी बरसाके,
बरसों, जला रहा कोई......
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