जहाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जहाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

मुकम्मल जहाँ ...एक क्षणिका ...


मैंने कब मुकम्मल जहाँ माँगा?
जानती हूँ नही मिलता!
मेरी जुस्तजू ना मुमकिन नहीं !
अरे पैर रखनेको ज़मीं चाही,
माथे पर   एक टुकडा आसमाँ,
पूरी दुनिया तो नही माँगी?