बुधवार, 4 मई 2011

दुनियादारी और पगली....




हमने छोड़ दी सारी
दुनिया और दुनियादारी,
सिर्फ किसी एकके लिए,
जिनके लिए छोडी,
वो थे  दुनियादार बड़े!
पलटके हँसी उडाई,
बोले, वो सकते नही,
छोड़, दुनिया उनकी,
एक पगलीके लिए.....

सबक सीख सको तो सीखना.
 मत लगाना ,अपनी दुनिया,
दाँव पे किसी एक के लिए,
दुनियामे  नही पागल ऐसा ,
जो छोड़ दे अपनी   दुनिया ,
किसी एक पागल के लिए....


32 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

सही कह रही हो…………छोड दे सारी दु्निया किसी के लिये ये मुनासिब नही आदमी के लिये…………बहुत दर्द भरा है।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

ऐसे भी लोग हैं... बस मिल नहीं पाते...

shikha varshney ने कहा…

दिनिया की सच्ची तस्वीर दिखाती नज़्म. भावपूर्ण

Arvind Mishra ने कहा…

एक कडवा सच

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

sach kaha jitni aasani se nari sab kuchh kisi ek k liye nyochhavar kar deti hai utni mahaanta purush me ho hi nahi sakti. imandari se bhaavo ko sajaya hai.

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत भावमयी प्रस्तुति..

ehsas ने कहा…

वैसे भी प्यार करने वाले दुनियादारी से अलग होते है।

Sunil Kumar ने कहा…

शत प्रतिशत सत्य जीवन की सच्चाई बहुत सुंदर , आभार

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए
ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए!!
और वो भी एक पगली के लिए तो बिलकुल नहीं!! अब खुदा जाने कौन पागल है!! जग बौराना!!
३० तारीख की उपलब्धि के लिए बधाई..मैं बिना बधाई के लिए रुके चला आया था!!

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

सच्चाई पर आधारित कविता !
बहुत सुंदर !

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब....शुभकामनायें !!

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

हमने छोड़ दी सारी
दुनिया और दुनियादारी,
सिर्फ किसी एकके लिए,
जिनके लिए छोडी,
वो थे दुनियादार बड़े!
क्षमा जी बहुत सुंदर कविता है बधाई |

सदा ने कहा…

सच कहता है हर एक शब्‍द .... बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

Kajal Kumar ने कहा…

प्रेम में अक़्ल का काम ही क्या यूं भी

mridula pradhan ने कहा…

vyathit kar gayee.....

संतोष कुमार ने कहा…

वाह बहुत खूब !
सुंदर अभिव्यक्ति !

निशांत ने कहा…

aapki rachna acchi lagi..

विवेक Call me Vish !! ने कहा…

ek sachchai...jo seekh deti hai!! otr yakeen maniye bahut kuch seekhne ko mila iss post se...

Jai HO Mangalmay HO

संजय भास्कर ने कहा…

शत प्रतिशत सच्चाई
...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

शारदा अरोरा ने कहा…

prem ka ye roop dukhdaaee hai ..

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सच्चाई पर आधारित.

शोभना चौरे ने कहा…

सब कुछ सिखा हमने न सीखी होशियारी |

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

...

ZEAL ने कहा…

Very touching creation...It's a fact and known by all of us. Yet we commit such grave errors , time and again.

राकेश कौशिक ने कहा…

सच को उजागर करती भावमयी रचना

राकेश कौशिक ने कहा…

सभी रचनाओं पर त्वरित टिप्पणियों के सादर साभार धन्यवाद् - इस टिपण्णी को प्रकाशित न करें

mahendra srivastava ने कहा…

बढिया है

Richa P Madhwani ने कहा…

duniyadari nhi chhod saktey..warna..ek indian aur angrez mai koi fark nhi rahega..
sab k sab internet chat mai itne busy hai ki kisi rishtedar k pas apne pariwar walo k liye waqt nhi raha....

Richa P Madhwani ने कहा…

http://shayaridays.blogspot.com

सदा ने कहा…

कल 02/11/2011 को आपकी कोई एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है।

धन्यवाद!

Prakash Jain ने कहा…

Bahut khoob

www.poeticprakash.com

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

सबक सीख सको तो सीखना.
मत लगाना ,अपनी दुनिया,
दाँव पे किसी एक के लिए,

बहुत ही अच्छा संदेश!

सादर