बुधवार, 18 अप्रैल 2012

अरसा बीता ...


लम्हा,लम्हा जोड़ इक दिन बना,
दिन से दिन जुडा तो हफ्ता,
और फिर कभी एक माह बना,
माह जोड़,जोड़ साल बना..
समय ऐसेही बरसों बीता,
तब जाके उसे जीवन नाम दिया..
जब हमने  पीछे मुडके देखा,
कुछ ना रहा,कुछ ना दिखा..
किसे पुकारें ,कौन है अपना,
बस एक सूना-सा रास्ता दिखा...
मुझको किसने कब था थामा,
छोड़ के उसे तो अरसा बीता..
इन राहों से जो  गुज़रा,
वो राही कब वापस लौटा?

 

कुछ  कपडे  के  तुकडे ,कुछ  जल  रंग  और  कुछ  कढ़ाई .. इन्हीं के संयोजन से ये भित्ती चित्र बनाया है.




17 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

राह बड़ी है, लम्बा जीवन,
चलते रहना काम हमारा।

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

जब हमने पीछे मुडके देखा,
कुछ ना रहा,कुछ ना दिखा..
किसे पुकारें ,कौन है अपना,
बस एक सूना-सा रास्ता दिखा...

जीवन में एक मोड ऐसा आता ही है!...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति क्षमा जी!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

एकला चलो .... सुंदर चित्र

सदा ने कहा…

जब हमने पीछे मुडके देखा,
कुछ ना रहा,कुछ ना दिखा..
किसे पुकारें ,कौन है अपना,
बस एक सूना-सा रास्ता दिखा..
भावमय करती शब्‍द रचना ...

expression ने कहा…

पीछे मुड कर देखना ही क्यूँ..................
जो साथ नहीं उसको पुकारना क्यूँ????

सुंदर रचना.....

ASHA BISHT ने कहा…

sankshipt shbdon mein gahare bhaw..

shikha varshney ने कहा…

अकेले आये थे अकेले ही जाना है तो फिर चलना भी अकेले है.

Kailash Sharma ने कहा…

यहाँ कौन किसके साथ चलता है...बहुत सुन्दर

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

:)

Arvind Mishra ने कहा…

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा
जिसने तुझे भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो

vish thakur ने कहा…

hamesha ki tarah adbut ...apki rachnadharmita kamal ki hai !! shubhkamnaye apki anant uchaeye ke liye :)

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

जीवन एक सफर है , और कभी कभी इस की राहे बहुत ही दुखदायी होती है ,. लेकिन जीवन तो फिर भी चलते ही रहता है न.

आपको एक सुन्दर से जीवन की अनंत बधाईयां .

संजय भास्कर ने कहा…

मनोभावों का अनुपम निरूपण।
बहुत अच्छी रचना पढ़ने को मिली।

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह बहुत सुंदर

abhi ने कहा…

सुन्दर!! :)

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

सुंदर एहसास।

mridula pradhan ने कहा…

bahut achcha likhi hain.