रविवार, 12 सितंबर 2010

एक सुबह और आयी..

कुछ किरने  परदे से झाँक गयीं,
कानों में आवाजें गूँज गयीं,
दिल से कुछ आहें निकलीं,
सड़क बोली,एक सुबह और आयी..

पलकों से सपने लेने आयी,
उजालों में गुरूर  से लूटने आयी,
खो गयी रौशनी सितारों की,
तेज़ धूप हमें होशमे लाई,

हाय! कैसी बेरहमी तेरी!
मरहम तो किया नही,
छुपे ज़ख्मों पे हँसने आयी,
उन्हें और कुरेदने आयी...

32 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता।

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
काव्यशास्त्र (भाग-1) – काव्य का प्रयोजन, “मनोज” पर, आचार्य परशुराम राय की प्रस्तुति पढिए!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

पलकों से सपने लेने आयी,
उजालों में गुरूर से लूटने आयी,
खो गयी रौशनी सितारों की,
तेज़ धूप हमें होश में लाई...

वाह क्षमा जी,
कितना प्यारा है आपका अंदाज़े-बयां.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
--
बधाई!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
--
बधाई!

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
काव्यशास्त्र (भाग-1) – काव्य का प्रयोजन, “मनोज” पर, आचार्य परशुराम राय की प्रस्तुति पढिए!

विवेक सिंह ने कहा…

शुक्र है आयी तो !

shikha varshney ने कहा…

bahut sundar..

अरुणेश मिश्र ने कहा…

एक सुबह और आई
अनेक संभावनाओँ के साथ ।
प्रशंसनीय रचना ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत अंदाज़ ..

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

वेदना का नई अनुभूति...

abhi ने कहा…

:)

Arvind Mishra ने कहा…

जख्मों को कुरेदने या मीठी कसक का अहसास ?

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश कि शीघ्र उन्नत्ति के लिए आवश्यक है।

एक वचन लेना ही होगा!, राजभाषा हिन्दी पर संगीता स्वारूप की प्रस्तुति, पधारें

arvind ने कहा…

vaah...bahut achhi kavita.

vandan gupta ने कहा…

हाय! कैसी बेरहमी तेरी!
मरहम तो किया नही,
छुपे ज़ख्मों पे हँसने आयी,
उन्हें और कुरेदने आयी...

आह! बस यही तो दर्द की इम्तिहाँ है………………बेह्द उम्दा प्रस्तुति।

Unknown ने कहा…

very well written.... i just wana say one thing " you know somethiong people need not fear the unknown if they are capable of achiving what they need and want."


JAI HO Mangalmay HO

shikha varshney ने कहा…

एक सुबह और आई..
वाह बेहतरीन अंदाज.

दिगंबर नासवा ने कहा…

भोर की किरण .. खुशियों के साथ गम भी लाती है ...... लाजवाब शब्द विन्यास है ....

ईद और गणेश चतुर्थी की बहुत बहुत मंगल कामनाएँ ....

ज्योति सिंह ने कहा…

कुछ किरने परदे से झाँक गयीं,
कानों में आवाजें गूँज गयीं,
दिल से कुछ आहें निकलीं,
सड़क बोली,एक सुबह और आयी..bahut sundar

♥°ღ•मयंक जी●•٠·♥ ने कहा…

didi bahut acchi kavita hai . bas aise hi likha kare .

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

कुछ किरने परदे से झाँक गयीं,
कानों में आवाजें गूँज गयीं,
दिल से कुछ आहें निकलीं,
सड़क बोली,एक सुबह और आयी..

kya kahne hain, fir se ek subah aa gayee.......:)
pyari rachna

अनाम ने कहा…

bahut hi achhi prastuti....badhaii.....

संजय भास्‍कर ने कहा…

वाह बेहतरीन अंदाज.....
mere blog par swagat hai..

इश्क क्या होता है ............!

निर्मला कपिला ने कहा…

पलकों से सपने लेने आयी,
उजालों में गुरूर से लूटने आयी,
खो गयी रौशनी सितारों की,
तेज़ धूप हमें होश में लाई...
क्षमा जी बहुत सुन्दर रचना है--- उजालों के गरूर--- सही बात है। बधाई

Apanatva ने कहा…

dil se likhee dil ko choone walee ek pyaree rachanaa .

HBMedia ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
...... लाजवाब

शोभना चौरे ने कहा…

han ye bhi aik andaj hai ?

BrijmohanShrivastava ने कहा…

सडक ने कितने कष्ट से बोला होगा कि एक सुवह और आई न जाने क्या अनथर््ा करेगी ।मरहम तो किया नहीं जख्मों पे हंसने आई लेकिन हम भी तो कह सकते हैं ’’नमक मेरे जख्मों पे हंस हंस के छिडको ,सितम भी इनायत नुमा चाहता हूं ’’ बहुत अच्छी रचना ।

sandhyagupta ने कहा…

पलकों से सपने लेने आयी,
उजालों में गुरूर से लूटने आयी,
खो गयी रौशनी सितारों की,
तेज़ धूप हमें होश मे लाई.

वाह.सुन्दर और अर्थपूर्ण.शुभकामनाएं.

पूनम श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुन्दर शब्दों में खूबसूरत अभिव्यक्ति----।

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और सहज भावपूर्ण अभिव्यक्ति .....आभार...

Saleem Khan ने कहा…

sundar !