मंगलवार, 4 जनवरी 2011

दूर रेह्केभी ......


दूर रेह्केभी क्यों
इतने पास रहते हैं वो?
हम उनके कोई नही,
क्यों हमारे सबकुछ,
लगते  हैं वो?
सर आँखोंपे चढाया,
अब क्यों अनजान,
हमसे बनतें हैं वो?

वो अदा थी या,
है ये अलग अंदाज़?
क्यों हमारी हर अदा,
नज़रंदाज़ करते हैं वो?
घर छोडा,शहर  छोडा,
बेघर हुए, परदेस गए,
और क्या, क्या, करें,
वोही कहें,इतना क्यों,
पीछा करतें हैं वो?

खुली आँखोंसे नज़र
कभी आते नही वो!
मूंदतेही अपनी पलकें,
सामने आते हैं वो!
इस कदर क्यों सताते हैं वो?
कभी दिनमे ख्वाब दिखलाये,
अब क्योंकर कैसे,
नींदें भी हराम करते हैं वो?

जब हरेक शब हमारी ,
आँखोंमे गुज़रती हो,
वोही बताएँ हिकमत हमसे,
क्योंकर सपनों में आयेंगे वो?
सुना है, अपने ख्वाबों में,
हर शब मुस्कुरातें हैं वो,
कौन है,हमें बताओ तो,
उनके ख्वाबोंमे आती जो?
दूर रेह्केभी क्यों,
हरवक्त पास रहते  हैं वो?

27 टिप्‍पणियां:

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

वो अदा थी या,
है ये अलग अंदाज़?
क्यों हमारी हर अदा,
नज़रंदाज़ करते हैं वो?
क्षमा जी, बहुत अच्छी रचना है...
एक शायर का ये शेर याद आ रहा है, मुलाहिज़ा फ़रमाएं
अपना दामन भी न छूने दे मुझे
उठना चाहूं तो इजाज़त न मिले.
नए साल की मुबारकबाद.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

वो अदा थी या,
है ये अलग अंदाज़?
क्यों हमारी हर अदा,
नज़रंदाज़ करते हैं वो?
क्षमा जी, बहुत अच्छी रचना है...
एक शायर का ये शेर याद आ रहा है, मुलाहिज़ा फ़रमाएं
अपना दामन भी न छूने दे मुझे
उठना चाहूं तो इजाज़त न मिले.
नए साल की मुबारकबाद.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत बढ़िया..

रचना दीक्षित ने कहा…

वो अदा थी या,
है ये अलग अंदाज़?
क्यों हमारी हर अदा,
नज़रंदाज़ करते हैं वो?

बहुत खूब अंदाज है. सुंदर कलाम.
नया साल आपको मुबारक

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना प्रकाशित की है आपने नये साल में!
बधाई!

'उदय' ने कहा…

जब हरेक शब हमारी ,
आँखोंमे गुज़रती हो,
वोही बताएँ हिकमत हमसे,
क्योंकर सपनों में आयेंगे वो?
... kyaa kahane ... bahut sundar !!

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

आपने वो गाना नहीं सुना.. वो पास रहें या दूर रहें, नज़रों में समाए रहते हैं. इतना तो बता दे कोई हमें, क्या प्यार इसी को कहते हैं.
कोमल भावों से पगी एक कोमल कविता!!

वन्दना ने कहा…

वाह! इतना बडा सच कितनी सरलता से कह दिया।

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खूब अंदाज है.
नया साल आपको मुबारक

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत संजीदा तरीके से लिखी गयी कविता

शारदा अरोरा ने कहा…

bahut hi khoobsoorat hai ye tarana ......wish you a very very happy new year ..

Arvind Mishra ने कहा…

दूर रेह्केभी क्यों,
हरवक्त पास रहते हैं वो?
बहुत अभिव्यक्तिपूर्ण

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

मन में समाई प्रेम और रिश्ते के बारे में बहुत सुन्दर कविता ...
नववर्ष की शुभकामनायें ...

विवेक Call me Vish !! ने कहा…

It such a ROmantic POEM ! i just ..... na i hve no words for tht poem.. its so SARAL and ...SWEET!!

NAV Nutan Varsh ki shubhkamnaye...thada der se hi wish karne ke liye mafe bt aapka phone hi nhi mila....m kya karu...or my net is not working properly !!


Jai HO MANGALMAY HO

राकेश कौशिक ने कहा…

"खुली आँखोंसे नज़र
कभी आते नही वो!
मूंदतेही अपनी पलकें,
सामने आते हैं वो!"

बहुत खूब - नव वर्ष २०११ की मंगल कामना

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

sundar abhivykti badhai

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

"खुली आँखोंसे नज़र
कभी आते नही वो!
मूंदतेही अपनी पलकें,
सामने आते हैं वो!"

वाह, क्या बात है !

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

प्रेम और रिश्ते के बारे में
बहुत सुन्दर कविता
आभार
शुभ कामनाएं

mridula pradhan ने कहा…

sunder bhaw.

सूर्य गोयल ने कहा…

सुन्दर भावो को अच्छे शब्दों में पिरो कर दिल को कछु लेने वाली कविता. बधाई और शुभकामनाये. आप मेरी गुफ्तगू में शामिल हुए उसके लिए धन्यवाद.

संजय भास्कर ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

Happy Republic Day.........Jai HIND

: केवल राम : ने कहा…

घर छोडा,शहर छोडा,
बेघर हुए, परदेस गए,
और क्या, क्या, करें,
वोही कहें,इतना क्यों,
पीछा करतें हैं वो?

एक दम दिल के करीब गुजर गयी पंक्तियाँ ....पूरी कविता ...गजब है ...शुक्रिया

निर्मला कपिला ने कहा…

दूर रेह्केभी क्यों,
हरवक्त पास रहते हैं वो?



सुना है, अपने ख्वाबों में,
हर शब मुस्कुरातें हैं वो,
कौन है,हमें बताओ तो,
उनके ख्वाबोंमे आती जो?
दूर रेह्केभी क्यों,
हरवक्त पास रहते हैं वो?
जरूर आपको याद करके ही मुस्कुराते होंगे।
वाह कमाल की पँक्तियाँ हैं पूरी रचना भावमय सुन्दर है। बधाई।

वीना ने कहा…

सुना है, अपने ख्वाबों में,
हर शब मुस्कुरातें हैं वो,
कौन है,हमें बताओ तो,
उनके ख्वाबोंमे आती जो?
दूर रेह्केभी क्यों,
हरवक्त पास रहते हैं वो?

बहुत खूबसूरत पंक्तियां
गणतंत्र दिवस पर बधाई

क्षितिजा .... ने कहा…

दूर हो कर भी जो पास होने का एहसास है ... उसमें कितना दर्द है ... ये कोई hi बता सकता है ... और आपने बहुत ख़ूबसूरती से बताया है ....

dipayan ने कहा…

बहुत खूब । सुन्दर रचना । बधाई ।