शुक्रवार, 18 मार्च 2011

होली जो भुलाये नहीं भूलती!

हम  उन  दिनों  मुंबई  में  थे . मार्च का महीना था. होली अब के शुक्रवार को थी,इस कारण लम्बा वीक एंड मिल गया था. मेरी चार सहेलियाँ नाशिक से बृहस्पतवार की शाम को ही आ पहुँचीं थीं. खूब गपशप  का माहौल बना हुआ था. मैंने काफी सारे व्यंजन,होली के मद्देनज़र बना के रखे थे. शुक्रवार की सुबह मालपुए बनाने का इरादा था. सोचा सबको नाश्तेमे यही परोसा जाये. उसी की तैय्यारी में मै रसोई में लगी हुई थी.

रसोई  को लग के बैठक थी,सो साथ,साथ गप भी जारी थी. होली पे फिल्माए गए गीत सुननेकी चाह में टी वी  भी चल रहा था.इतने में दरवाज़े पे घंटी बजी. मै पहुँची तब तक अर्दली ने दरवाज़ा खोल दिया था. बता दूँ की मेरे पती तब ऊंचे ओह्देपे (CID )में सरकारी मुलाजिम थे. दरवाज़े पे आयी हुई टोली हमारी सोसायटी के लोगों की ही थी.उस में अधिकतर भारतीय प्रशासनिक सेवामे कार्य रत थे.
"कहाँ हैं तुम्हारे साहब  ?" किसीने अर्दली को सवाल किया.
"जी, वो तो बाथरूम में हैं!" अर्दली ने बताया!मै झट इनके छुटकारे के लिए आगे बड़ी और कहा," आप सब को होली मुबारक हो! दरअसल,ये अर्दली अभी,अभी पहुँचा है....इसे नहीं पता की,ये तो सुबह साढ़े छ: बजे ही अपनी गोल्फ किट लिए गोल्फ कोर्स पे गायब हो चुके हैं!"
"अरे, ये जनाब कहीं बाथरूम में छुप के तो नहीं बैठे?"किसी ने अपनी शंका व्यक्त की!
"नहीं,नहीं...ये तो वाकई सुबह गोल्फ खेलने चले जाते हैं...मै रोज़ ही देखता हूँ....चलो,चलो...इन्हें फिर कभी धर लेंगे...",हमारे एकदम सामने रहनेवाले और बेहद करीबी पड़ोसी,रमेश  जी ने  कहा. सब ने मान लिया !

"लेकिन,आपके हाथ के व्यंजन खाने तो हम ज़रूर आयेंगे!" उनमे से एक ने कहा!
"जी...जी...ज़रूर!!"मैंने कहा...मेरी जान छूटी. पतिदेव को होली खेलना क़तई भाता नहीं! ये तो सचमे बाथरूम में थे! दरवाज़ा बंद होते ही मै बाथरूम के दरवाज़ेपे पहुची,तथा खट खटा के कहा," मै जब तक कहूँ ना,आप बाहर मत आना!" कहके मैंने बाहर से कूंडी लगा दी!
अब हम सहेलियों का गपशप का दौर दोबारा जोर पकड़ गया! मै गरमागरम मालपुए बना बना के मेज़ पे भेजती जा रही थी....हंसी मजाक चल रहा था...फ्लैट सड़क के काफी करीब था,सो सड़क परकी सारी पी,पी,पों,पों सुनायी देती जा रही थी!
"पिया तोसे नैना लागे रे!" ये गीत टी वी पे आया था. उसपे सबने जमके चर्चा  की. चर्चा क्या,खूब तारीफ हुई...guide के दिन याद किये,अदि,अदि.

कुछ डेढ़ घंटा या शायद उससे अधिक बीत गया. जमादारनी आयी तथा  सीधे मेरे कमरे में गयी और फिर घबराई-सी बाहर आके मुझ से मुखातिब हुई," बाई साहब...! आपने कहना तो था,की साहब अन्दर हैं...मै तो कूंडी खोल सीधे अन्दर पहुँच गयी!"
इतने में पसीने में तरबतर हुए,ये भी सामने आये! मैंने चकराके सवाल किया," अरे! आप गोल्फ खेलने नहीं गए?"
"हद करती हो! गोल्फ खेलने नहीं गया! मुझे बाथरूम में बंद कर के तुम निकल आयीं....ये तक नहीं बताया की,किसलिए बाहर आने से रोक रही हो...pot पे बैठे, बैठे दोनों अखबार तीन,तीन बार पढ़ लिए...मुम्बई की गर्मी अलग! बताओ,गोल्फ खेलने कैसे जाता? तुम्हें इतने भी होश नहीं? दरवाज़ा  भी खडकाने से डर रहा था,की,पता नहीं तुमने क्यों टोक दिया है!" पतिदेव उबल पड़े! और मेरे कुछ देर के लिए होश उड़ गए! मै अपनी रसोई और अपनी गपशप में इन्हें बंद कर के भूलही गयी थी!
मेरी शक्ल पे हवाईयाँ उडती देख,मेरी सहेलियाँ ज़ोर ज़ोरसे हँसने लगीं! एक इनसे मुखातिब होके बोली," चलिए, ये होली भी खूब याद रहेगी! लोग रंगों से भीगते हैं,आप पसीने से भीग रहे थे!"
ना जाने कितने साल बीत गए,पर ये बेवकूफी भुलाये नहीं भूलती! बल्कि हर होली पे याद आही जाती है!
















30 टिप्‍पणियां:

Bhushan ने कहा…

जीवन की ऐसे क्षण याद रह जाते हैं और इनमें रस और रंग, भूल और अहसास का समायोजन होता है.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

ये तो गजब कर दिया..

shikha varshney ने कहा…

yahi khatti meethee yaden aur bebkoofee hi to jeevan men ras bhar deti hain :)
Happy Holi.

वन्दना ने कहा…

ऐसी यादे ही याद रह जाती हैं…………आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

ज्योति सिंह ने कहा…

jab kuchh alag hota hai to wo khas hota hai .sundar likha hai ,holi mubarak ho .

VICHAAR SHOONYA ने कहा…

ऐसी गलतियाँ भी कभी कभी हो ही जाती हैं जो भुलाये नहीं भूलती. आपको और आपके परिवार को होली की बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं.

संजय भास्कर ने कहा…

यादे ही याद रह जाती हैं

संजय भास्कर ने कहा…

रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|
कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

mridula pradhan ने कहा…

chaliye yadon ka ek rang yah bhi..... bilkul naya sa....

Apanatva ने कहा…

ab swasth me sudhar hai .
ek arase baad aj hee laptop touch kiya hai.
anjane hee holi se darne kee naahk sazaa mil gayee.....
ab koshish rahegee ki regular rahoo .
sabheeko kafee miss kiya hai maine bhee .

Kailash C Sharma ने कहा…

ऐसे क्षण ही जिंदगी की यादें बन जाते हैं...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

:):):):) हा आह आह ...हंसी रुके तो कुछ लिखूं ...सच कभी कभी स्त्रियां दूसरे काम में व्यस्त हो कैसे सब भूल जाती हैं ... मैं तो अक्सर सब्ज़ी ही जलाती हूँ ...आप तो :):)

होली की शुभकामनायें

Patali-The-Village ने कहा…

ऐसे क्षण ही जिंदगी की यादें बन जाते हैं|
होली पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ|

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपको होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

BrijmohanShrivastava ने कहा…

होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

मीनाक्षी ने कहा…

यादगार होली...रंगों का पर्व मुबारक हो .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जीवन के ऐसे ही कुछ पल होते हैं जिनकी यादें उम्र भर रहती हैं ...
आपको और समस्त परिवार को होली की हार्दिक बधाई और मंगल कामनाएँ ....

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

रंग-पर्व पर हार्दिक बधाई.

Dorothy ने कहा…

नेह और अपनेपन के
इंद्रधनुषी रंगों से सजी होली
उमंग और उल्लास का गुलाल
हमारे जीवनों मे उंडेल दे.

आप को सपरिवार होली की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर
डोरोथी.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

होली की अनेक शुभकामनायें !
बहुत ही रोचक किस्सा रहा ... मज़ा आ गया पढके !

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

गज़ब संस्मरण:)
कभी न भूल सकने वाला वाकया। उस समय आप को जैसा भी लगा हो, हमें तो आज मजा आ गया।

होली की शुभकामनाओं के लिये आपका धन्यवाद, आप सबके लिये भी शुभकामनायें।

G.N.SHAW ( B.TECH ) ने कहा…

क्षमा जी बेहद सुन्दर यादे ! होली की बधाई हो !

: केवल राम : ने कहा…

अनजाने ही जिन्दगी में कई बार कुछ ऐसा घटित हो जाता है जो हमें जिन्दगी भर याद रहता है ......आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनायें

Abhilash Pillai ने कहा…

bahut badhiya likha hain aapne. Padhkar aanand aaya... laga jaise sab saame ho raha hain

CSK ने कहा…

sundar shabdon ke liye dhanyavaad,saundarya ka varnan to aapka anusaran karke hi seekha hai..kshama ji...asha hai humpar apni krupadrishti yun hi banayen rakhengi..aajkal pratispardhaaon me vyast hone ke kaaran blog par nahi aa pa raha..kshamaji aapse is galti ki kshama chahta hun...

Basanta ने कहा…

ha ha ha! But it must have been real hard for your husband to stay there for such a long time.

(Belated) happy holi to you and your readers.

anshumala ने कहा…

बहुत ही मजेदार संस्मरण पढ़ कर हंसी आ गई और अपनी एक याद भी ताजा हो गई जब हमारी ढाई साल की बेटी ने हम पति पत्नी को हमारे कमरे में बंद कर दिया हमसे नाराज हो कर |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

यादगार पोस्ट बधाई क्षमा जी |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

यादगार पोस्ट बधाई क्षमा जी |

Manpreet Kaur ने कहा…

अच्छा पोस्ट है जी !हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर जरुर आना !
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