रविवार, 30 मार्च 2014

मुल्क खामोश क्यों है?

दिलों में खुशी की कोंपल नहीं,
फिर ये मौसमे बहार क्यों है?
सूखे पड़े हैं पेड़ यहाँ,
इन्हें परिंदों का इंतज़ार क्यों है?
गुलों में शहद की बूँद तक नहीं,
इन्हें भौरों का इंतज़ार क्यों है?
दूरदूर तक दर्याये रेत है,
मुसाफिर तुझे पानी की तलाश क्यों है?
बेहरोंकी इस बेशर्म बस्तीमे ,
हिदायतों का शोर क्यों है?
कहते हैं,अमन-औ चैन का मुल्क है,
यहाँ दनादन बंदूक की आवाज़ क्यों है?
औरतको  देवी कहते हैं इस देश में,
सरेआम इसकी अस्मत  लुटती  है,
मुल्क फिर भी खामोश क्यों है?



10 टिप्‍पणियां:

शारदा अरोरा ने कहा…

badhiya ...aapne bahut vakt bad kuchh post kiya hai ...

Digamber Naswa ने कहा…

इंसान कि बेबसी का लेखा जोखा लखा है आपने ... इंसानियत को जंग लग गया है जैसे ..

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (01-04-2014) को "स्वप्न का संसार बन कर क्या करूँ" (चर्चा मंच-1562)"बुरा लगता हो तो चर्चा मंच पर आपकी पोस्ट का लिंक नहीं देंगे" (चर्चा मंच-1569) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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नवसम्वत्सर और चैत्र नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

जिन्दगी है ही कुछ ऐसी बेबसी की कहानी सी...

संजय भास्‍कर ने कहा…

नए शब्दों से परिचय हुआ .......मिलकर अच्छा
लगा !
सुंदर रचना रची है आपने...

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

आह दर्द

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति , आदरणीय धन्यवाद !
नवीन प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ त्याग में आनंद ~ ) - { Inspiring stories part - 4 }

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

बहुत ख़ूब!!

संजय भास्‍कर ने कहा…

आपकी इस रचना को कविता मंच व म्हारा हरियाणा ब्लॉग पर साँझा किया गया है !

http://bloggersofharyana.blogspot.in/
http://kavita-manch.blogspot.in/

संजय भास्कर

mridula pradhan ने कहा…

bhawpoorn.......