रविवार, 3 अप्रैल 2011

कीमत हँसी की.....


  क़ीमत हर हँसी की
 अश्क़ों से  चुकायी,
पता नही और कितना
कर्ज़ रहा है बाक़ी,
आँसूं  हैं, कि, थमते नही!


36 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

उफ़ ..कितना क़र्ज़ है ...मार्मिक प्रस्तुति

mridula pradhan ने कहा…

karuna se susajjit....bahut sundar.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Bahut khoob ... kamaal ki panktiyaan hain ...

abhi ने कहा…

:)

: केवल राम : ने कहा…

आँखें भर आयीं ....बहुत गहरा भाव भरा है इन पंक्तियों में ...आपका आभार

अनूप शुक्ल ने कहा…

अच्छा है!

Kajal Kumar ने कहा…

वाह. सुंदर.

Rahul Singh ने कहा…

हंसी के आंसू या खुशी के आंसू.

Arvind Mishra ने कहा…

ओह -इन्हें वे स्नेहिल पंखुड़ियां चाहिए जहाँ ये मोती मन कर आलोकित हो सकें !

Apanatva ने कहा…

chand lafzo me gahree baat........

वन्दना ने कहा…

कुछ कर्ज़ ज़िन्दगी भर चुकता नही होते………बेहद दर्दभरी प्रस्तुति।

ZEAL ने कहा…

.

This is called life !

Beautiful lines.

.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

मार्मिक प्रस्तुति.


नव-संवत्सर और विश्व-कप दोनो की हार्दिक बधाई .

shikha varshney ने कहा…

इतना क़र्ज़ ??? मार्मिक प्रस्तुति.

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

apki ye chand lines padh kar vo geet yaad aa gaya...

jeene ke liye socha hi nahi...
dard sawaarne honge...
muskuraye gar to
muskurane ke karz utarne honge...

VIJUY RONJAN ने कहा…

AAnsu ho jaate hain dil ki zuban,
bahte rahte wo dariya samaan,
jeevan ki saari aapa dhaapi me,
aansu hi bah kar mitati hamari thakan.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

चार लाइनें, लेकिन काफी हैं..

ashish ने कहा…

क्यू छलक रहा दुःख मेरा , उषा की मृदु पलकों में
हा उलझ रहा सुख मेरा , निशा की घन अलकों में .

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍द ।

मेरे भाव ने कहा…

ख़ुशी हो या हो गम, छलक ही जाते हैं जाम
रोकने से रूकते नहीं, कर जाते हैं अपना काम

Sunil Kumar ने कहा…

मार्मिक प्रस्तुति. बधाई

Dimps ने कहा…

Mujhe pataa tha aapne kuch bahut badiya likha hoga issliye itne din baad jab blog check karne ka maukaa mila toh maine sabse pehle aapke blog ko check kia...

Very touchy n painful...

Regards,
Dimple

शोभना चौरे ने कहा…

khubsurat bhav

राजीव थेपड़ा ने कहा…

अरे वाह......

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भावपूर्ण प्रस्तुति |

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया क्षमा जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

बहुत भाव पूर्ण !

एक मतला आपके लिए …
हंसने की चाह ने कितना मुझे रुलाया है
कोई हमदर्द नहीं , दर्द मेरा साया है


गणगौर और नवरात्रि की शुभकामनाएं !
साथ ही…

नव संवत् का रवि नवल, दे स्नेहिल संस्पर्श !
पल प्रतिपल हो हर्षमय, पथ पथ पर उत्कर्ष !!

चैत्र शुक्ल शुभ प्रतिपदा, लाए शुभ संदेश !
संवत् मंगलमय ! रहे नित नव सुख उन्मेष !!

*नव संवत्सर की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !*


- राजेन्द्र स्वर्णकार

M VERMA ने कहा…

कहते हैं कि कर्ज चुकाया नहीं जा सकता

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

सेहत साथ नहीं दे रही इन दिनों.. इसलिए मुआफी चाहता हूँ..
इन चार लाइनों में आपने जीवन दर्शन समेट दिया है!!

इमरान अंसारी ने कहा…

क्षमा जी,

आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ.....देर से आने की माफ़ी चाहता हूँ.....आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा.....कितने कम शब्दों में कितनी गहरी बात कह गयीं हैं आप....सुभानाल्लाह......आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे.....

BrijmohanShrivastava ने कहा…

अभी तो ये भी समझ में नहीं आरहा कि ये आसू कर्ज पटा रहे है या अभी केवल व्याज ही जमा हो रहा है

अभिषेक प्रसाद 'अवि' ने कहा…

in aansuon ko thamne kabhi dena bhi nahi...
ye to wo moti hai jo jag ko muskurayenge...
andar rah gaye to zahar ban jayenge...
baahar aane to samandar ban jayenge....

Dr Varsha Singh ने कहा…

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत मार्मिक..अंतस को झकझोर दिया..

Anand Dwivedi ने कहा…

क़ीमत हर हँसी की
अश्क़ों से चुकायी,
पता नही और कितना
कर्ज़ रहा है बाक़ी,
आँसूं हैं, कि, थमते नही!
..
..
मेरी क्षमता नही कि मैं...आपकी इस रचना पर टिप्पड़ी करूं ये मैं जमीन पर सर रखकर आपकी इन भावनाओं को शब्दों को और आपको नमन करता हूँ...बस यही कर सकता था मैं.

हेमंत कुमार दुबे (Hemant Kumar Dubey) ने कहा…

क़र्ज़ कैसा भी हो अंततः आँसू ही तो देता है| बहुत सुन्दर प्यारी-सी कविता |

निर्झर'नीर ने कहा…

जब भी आपके ब्लॉग पे आता हूँ हर बार इन पंक्तियों पे आके ठहर जाता हूँ इससे आगे ऐसा लगता है जैसे कहने के लिए कुछ बचा ही ना हो ..हमेशा सोचता था की इनकी तरीफ्फ़ में क्या लिखूं लेकिन कभी शब्द ही नहीं मिले .
आज भी नहीं ,बस इतना कहूँगा की ..गागर में सागर समाया है