शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

चश्मे नम

परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,

कि इन्हें, लमहा, लमहा,

रुला रहा है कोई.....



चाहूँ थमना चलते, चलते,

क़दम बढ्तेही जा रहें हैं,

सदाएँ दे रहा है कोई.....




अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई......


35 टिप्‍पणियां:

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut umda ..vaah.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अद्भुत..स्पष्ट..सटीक..

vidya ने कहा…

बहुत सुन्दर..
कोमल सी प्रस्तुति..

सादर.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

छोटे-छोटे छंदों से सजी यह कविता मन को स्पर्श करती है!!

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई......

Vah gahari anubhutiyon ko sametati hui rachana hai....sadar abhar ke sath hi badhai.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

अरूण साथी ने कहा…

यह तो मोहब्बत के मरीज होने के आसार है
लगता है बहुत देर से कोई बीमार है।

Atul Shrivastava ने कहा…

बहुत बढिया।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,
तेरीही चाँदनी बरसाके,
बरसों, जला रहा कोई...

बहुत खूब ... ये तो साजिश है चाँद की ... किसी को शीतल करता है किसी को जलाता है ...

वन्दना ने कहा…

बेहद खूबसूरत्।

shikha varshney ने कहा…

खूबसूरत शब्द ...बहुत सुन्दर.

संजय भास्कर ने कहा…

आपकी कवितायेँ पढ़ कर लगता है कि पढ़ते ही रहें शानदार प्रस्तुती..

dheerendra ने कहा…

वाह!!!!!बहुत बेहतरीन मन को छूती रचना,लाजबाब प्रस्तुति,
NEW POST....
...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...

Arvind Mishra ने कहा…

वाह ..रूमानियत का एक यह भी सबब !

ASHA BISHT ने कहा…

pahli baar aapke blog pr aana hua...aur itna sundar padne ko mila...plz mere blog pr jaroor aayega..utsuk rahungi...

प्रेम सरोवर ने कहा…

प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

lokendra singh rajput ने कहा…

बहुत सुन्दर..

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

अद्भुत अभिव्यक्ति , बेहतरीन शाब्दिक चयन

Madhuresh ने कहा…

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई!



छू गयी ये पंक्तियाँ! सधन्यवाद.

सूत्रधार ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।
सुमन सिन्‍हा जी का परिचय देखें यहां ...

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति..

Deepak Shukla ने कहा…

Adarneey Kshama ji..

Jeevan ka har dard rulata..
Aankhon main aansu vo laata..
Vyakti kahin bhi jaaye chahe..
Dard, Chand sa sath hau aata..

Jab tak man main dard ho koi...
Aankhen nam hon dikhti royi...
Dard kabhi jo kaha na jaaye..
Antarman ko roz jalaaye...

Dard baantkar halka hota...
Peeda jo kah daaloge..
Nirmal hruday tumhara hoga..
Shanti swatah hi paa loge!!!...

Aap to kam shabdon main badi baatain kahne ki aadi hain...aapki kavita ka pratyuttar likh sakun..etna na anubhav hai, na samarthya...fir bhi apni chirparichit tukbandi shaili main maine kuchh shabd yahan likhe hain..asha hai wo shayad aapko theek lagen...

Sadar...

Deepak..

mridula pradhan ने कहा…

bhawbhini hai.....

Rishi ने कहा…

hamesha ki tarah...choti magar gehri...behti hui...bhut sundar...!!

मनोज कुमार ने कहा…

हृदयस्पर्शी रचना।

mahendra verma ने कहा…

चांदनी से जल जाना...
कितने खूबसूरत भाव हैं।

mahendra verma ने कहा…

चांदनी से जल जाना...
कितने खूबसूरत भाव हैं।

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

bahut khoobsurat...

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई......

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति...जानकारी देने के लिए आभार!

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा प्रस्तुति!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई....

गजब की अभिव्यक्ति ...

dinesh aggarwal ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति.....
कृपया इसे भी पढ़े-
नेता- कुत्ता और वेश्या(भाग-2)

amrendra "amar" ने कहा…

bahut sunder ..kam se kam sabdo me hi apne poora kavya udel diya

ZEAL ने कहा…

परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,

कि इन्हें, लमहा, लमहा,

रुला रहा है कोई.....

Great expression Kshama ji...

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