मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

मुझ संग खेलो होली...



कहाँ हो?खो गए हो?
अपने आसमाँ के लिए,
पश्चिमा रंग बिखेरती देखो,
देखो, नदियामे भरे
सारे रंग आसमाँ के,
किनारेपे रुकी हूँ कबसे,
चुनर बेरंग है कबसे,
उन्डेलो भरके गागर मुझपे!
भीगने दो तन भी मन भी
भाग लू आँचल छुडाके,
तो खींचो पीछेसे आके!
होती है रात, होने दो,
आँखें मूँदके मेरी, पूछो,
कौन हूँ ?पहचानो तो !
जानती हूँ , ख़ुद से बातें
कर रही हूँ , इंतज़ार मे,
खेल खेलती हूँ ख़ुद से,
हर परछायी लगे है,
इस तरफ आ रही हो जैसे,
घूमेगी नही राह इस ओरसे,
अब कभी भी तुम्हारी
मानती नही हूँ,जान के भी..
हो गयी हूँ पागल-सी,
कहते सब पडोसी...
चुपके से आओ ना,
मुझ संग खेलो होली ...

28 टिप्‍पणियां:

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

कितना प्यार भरा निमंत्रण दे डाला आपने!....होली के सुन्दर रंगों का अत्यंत सुन्दर एहसास!

घनश्याम मौर्य ने कहा…

आगामी होली को देखते हुए बहुत ही सामयिक कविता। पढ़कर होली की मस्‍ती अभी से छाने लगी है।

shikha varshney ने कहा…

वाह होली का रंग चढ़ने लगा ..आपकी तबियत अब कैसी है क्षमा जी ! आराम करिये.

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर कोमल अहसास और उनकी सुंदर अभिव्यक्ति..

सदा ने कहा…

देखो, नदियामे भरे
सारे रंग आसमाँ के,
किनारेपे रुकी हूँ कबसे,
अनुपम भाव संयोजन लिए आसमां के रंग ... बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रंग बिखेरो, होली आयी..

शारदा अरोरा ने कहा…

sundar kavita ...aap aaraam keejiye ...man hai ki kahta hi ja raha hai ...

vidya ने कहा…

क्यूँ याद आते हैं "वो" फागुन में?????

सुन्दर आमंत्रण क्षमा जी..

Rajesh Kumari ने कहा…

man ke bhaavon ka bahut achcha chitran kiya hai.

संजय भास्कर ने कहा…

सुंदर भावनाओं की अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति...

संजय भास्कर ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति...!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

:)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आ भी जाओ कि आ गयी होली...

vish thakur ने कहा…

hamesha ki tarah apne hi andaj ki kavita.....yad or holi ke rang ka achha talmel dekhne ko mila.....swagat hai !

vish thakur ने कहा…

hamesha ki tarah apne hi andaj ki kavita.....yad or holi ke rang ka achha talmel dekhne ko mila.....swagat hai !

Atul Shrivastava ने कहा…

माहौल बनने लगा होली का।

Dimple ने कहा…

चुपके से आओ ना,
मुझ संग खेलो होली ...

Bahut sundar... Dil k kareeb

Arvind Mishra ने कहा…

सुन्दर सलोनी सी बासंती कविता

Rishi ने कहा…

hamesha k tarah..nirmal...gahan...aur ati ati sundar...!!

mridula pradhan ने कहा…

madhur bhaw......

mahendra verma ने कहा…

होली का माहौल अब बनने लगा है।
सुंदर कविता।

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

KSHAMA JI BEHAD SUNDAR RACHANA ....SADAR ABHAR.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

लाल‍ित्‍य से भरपूर एक सुंदर कव‍िता

Udan Tashtari ने कहा…

नेह भरा निमंत्रण...सुन्दर!!

abhi ने कहा…

वाह...बेहतरीन!!!

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता | क्षमा जी प्रणाम |आपके निरन्तर उत्साहवर्धन के प्रति आभार |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता | क्षमा जी प्रणाम |आपके निरन्तर उत्साहवर्धन के प्रति आभार |

Manish Yadav ने कहा…

होली एक ऐसा पर्व है जिसमें बुलावा नहीं भेजते.. लोग खुद ब खुद चले आते हैं रंगों के साथ..
जब कोई हो तो महीना भर पहले से उसी के इन्तजार में तरह तरह के पकवान बना के घर में जमा कर लेते हैं.. शायद इसका स्वाद उसे "पसन्द" आ जाये..

अद्भुत संवेदना है.. ये पर्व नहीं हमारी जीवन धारा हैं..