शनिवार, 26 मई 2012

ना खुदाने सताया...




















कभी,कभी ज़िंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं,जहाँ केवल सवाल ही सवाल होते हैं! हर तरफ चौराहे...जिन्हें अपना माना,जान से ज्यादा प्यार किया...पता चलता है,वो तो परायों से बद्दतर निकले! किस पे विश्वास करें? आखिर ज़िंदगी का मकसद क्या है....बस चलते रहना?महीनों गुज़र जाते हैं,हँसी का मुखौटा ओढ़े और अन्दर ही अन्दर गम पिए! इम्तिहान की घड़ियाँ बिताये नहीं बीततीं! शायद ऐसे किसी दौर से गुज़रते हुए ये रचना लिख दी है!

ना खुदाने सताया
ना मौतने रुलाया
रुलाया तो ज़िन्दगीने
मारा भी उसीने
ना शिकवा खुदासे
ना गिला मौतसे
थोडासा रहम  माँगा
तो वो जिन्दगीसे
वही ज़िद करती है,
जीनेपे अमादाभी
वही करती है...
मौत तो राहत है,
वो पलके चूमके
गहरी  नींद सुलाती है
ये तो ज़िंदगी है,
जो नींदे चुराती है
पर शिकायतसे भी
डरती हूँ उसकी,
गर कहीँ सुनले,
पलटके एक ऐसा
तमाचा जड़ दे
ना जीनेके काबिल रखे
ना मरनेकी इजाज़त दे....

24 टिप्‍पणियां:

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

काश आपकी रचनाओं का दर्द बनावटी होता/ओधा हुआ होता.. लेकिन अफ़सोस इसी बात से होता है कि हम बनावटी कहानियां/कवितायें लिखते हैं और भोगी हुई.. बस परमात्मा से प्रार्थना है कि आपको इनसे मुक्ति दे!! आमीन!

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

ये एक बहुत ही संवेदिनशील रचना है . और आपके मन के भाव बखूबी इसमें आये हुए है . जेवण कुछ ऐसा ही है . आपको साधुवाद इस रचना के लिये .

धन्यवाद.
विजय

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गहरा, थाह पाना कठिन है..

Sanju ने कहा…

Very nice post.....
Aabhar!

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...रचना के भाव अंतस को गहराई तक छू गये...उत्कृष्ट अभिव्यक्ति...

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

apne upar itna dam rakh le ki jindgi tujhse poochhe ki teri rajaa kya hai?

itna nirash hona acchha nahi lagta.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच पूछो तो जीवन के ये खट्टे मीठे पल ही रुलाते हैं ... खुदा या मौत तो एहसास होता है जो अक्सर सकून देता है ...

सदा ने कहा…

गहन भाव लिए .. हर शब्‍द मन को छूता हुआ ..आभार

मंजुला ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति.....
आपके ब्लॉग पर लगे चित्र बहुत सुन्दर है ..ये सब क्या आपने बनाये है ? इस आर्ट को क्या कहते है ? इसे कैसे सिखा जा सकता है ?

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बेहद संवेदनशील रचना. व्यथा को अभिव्यक्त करना कई बार बहुत कठिन होता है, परन्तु आपने बहुत सहजता से लिख दिया है, शुभकामनाएँ.

Arvind Mishra ने कहा…

उफ़ ये अच्छे लोगों के लिए ही यह इतनी बेरहम दुनिया क्यों है ?

आशा बिष्ट ने कहा…

ना जीनेके काबिल रखे
ना मरनेकी इजाज़त दे...बेहतरीन अभिव्यक्ति....

Dr.R.Ramkumar ने कहा…

मौत तो राहत है,
वो पलके चूमके
गहरी नींद सुलाती है
ये तो ज़िंदगी है,
जो नींदे चुराती है



बहुत सही और शाश्वत पंक्तियां...

पर ग़ालिब ने दर्द भोगकर ही लिखा था...

दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना।


और अंत में
काश कोई किसी से नींद शेअर कर पाता...

मनोज कुमार ने कहा…

ज़िन्दगी में ऐसे वक़्त आते हैं, जब हम विपरीत धारा के थपेड़ों को सहते-सहते धैर्य खोने लगते हैं। यही वो पल होता है जब हमें एक छोटी सी आशा की किरण देती दीए को बुझने से बचाए रखना होता है।

प्रेम सरोवर ने कहा…

कविता बहुत अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी ।
धन्यवाद ।

शारदा अरोरा ने कहा…

hamesha ki tarah samvedansheel...

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

दिल को छूती कोमल भावाभिव्यक्ति।

सदा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
सदा ने कहा…

आपका बहुत-बहुत आभार

आशा जोगळेकर ने कहा…

जिंदगी सुन ले तो तमाचा जड दे जो न जीने के काबिल छोडे और न ....................।

Devesh Pratap ने कहा…

bahut sateek....

lifes' like this.. never fair never right ने कहा…

Bahut dino se same thought mujhe pareshan kar raha hai .. Life no matter how pointless death brings end to it. All the misery and pain disappears instantly. But again I feel afraid of praying for it.

Beautiful Poem