सोमवार, 11 जून 2012

खिलने वाली थी...



खिलनेवाली थी, नाज़ुक सी
डालीपे नन्हीसी कली...!
सोंचा डालीने,ये कल होगी
अधखिली,परसों फूल बनेगी..!
जब इसपे शबनम गिरेगी,
किरण मे सुनहरी सुबह की
ये कितनी प्यारी लगेगी!
नज़र लगी चमन के माली की,
सुबह से पहले चुन ली गयी..
खोके कोमल कलीको अपनी
सूख गयी वो हरी डाली....

( भ्रूण  हत्या  को  मद्देनज़र  रखते  हुए  ये  रचना  लिखी  थी ..)

22 टिप्‍पणियां:

expression ने कहा…

मर्मस्पर्शी रचना....

बहुत गहन अभिव्यक्ति क्षमा जी.

अनु

सदा ने कहा…

गहन भाव लिए उत्‍कृष्‍ट लेखन ... आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सूखी हुयी डाल फिर भी पेड़ से जुड़ी रहती है ... मार्मिक रचना

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

bahut pyari see dil ko chhuti rachna... sach hi kaha aapne kali jab phool ban kar khilne wali thi tabhi mali ne tod diya..:(

shikha varshney ने कहा…

उफ़ ...बेहद मार्मिक .

Reena Maurya ने कहा…

गहन भाव लिये मार्मिक रचना..

संजय भास्कर ने कहा…

... बेहद मर्मस्पर्शी प्रभावशाली अभिव्यक्ति

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी रचना...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जीवन को सहारा मिले..

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

इस देश में इस हत्‍या के लि‍ए फॉंसी नहीं ही होगी...

आशा बिष्ट ने कहा…

मर्मस्पर्शी

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

kya kahun, nishabd hun.

Rishi ने कहा…

sankshipt me asadharan kehne ki asadharan kshamta hai aap me kshama ji ...behad sundar ..!!

Saras ने कहा…

इस अभिशाप को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा है ....

Arvind Mishra ने कहा…

बहुत भावपूर्ण

Arvind Mishra ने कहा…

एक कटु सत्य का साक्षात्कार

lifes' like this.. never fair never right ने कहा…

bina related shabdon ka prayog kiye ek bahut he serious idea bahut he halke tarike se prastut karne ke liye badhaiyan ..

bahut achchi rachna hai ..

abhi ने कहा…

maarmik!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मार्मिक ... कडुवे सच कों लिखा है ...

Noopur ने कहा…

First time i steeped in here....nice post

रवि शंकर प्रसाद Ravi Shankar Prasad ने कहा…

सुन्दर एवं भावपूर्ण...

आशा जोगळेकर ने कहा…

आह !