गुरुवार, 27 जून 2013

दूर अकेली चली....

कपडेके चंद टुकड़े, कुछ कढाई, कुछ डोरियाँ, और कुछ water कलर...इनसे यह भित्ति चित्र बनाया था...कुछेक साल पूर्व..


वो राह,वो सहेली...
पीछे छूट चली,
दूर  अकेली  चली  
गुफ्तगू, वो ठिठोली,
पीछे छूट चली...

किसी मोड़ पर  मिली,
रात इक लम्बी अंधेरी,
रिश्तों की भीड़ उमड़ी,
पीछे छूट चली...

धुआँ पहन  चली गयी,
'शमा' एक जली हुई,
होके बेहद अकेली,
जब बनी ज़िंदगी पहेली
वो राह ,वो सहेली...

ये कारवाँ उसका नही,
कोई उसका अपना नही,
अनजान बस्ती,बूटा पत्ती,
बिछड़ गयी कबकी,
वो राह,वो सहेली...


13 टिप्‍पणियां:

निहार रंजन ने कहा…

वक़्त तो गुज़र जाता है. सहारा बस उन्ही यादों का रह जाता है जिसमे गोता लगाकर फिर से ख़ुशी के दो पल ढूंढें जा सकें. सुन्दर पंक्तियाँ.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये कारवाँ उसका नही,
कोई उसका अपना नही,
अनजान बस्ती,बूटा पत्ती,
बिछड़ गयी कबकी,
वो राह,वो सहेली...

पता नहीं चलता की दिल का डैड शब्दों में है या इस कढाई में ... दोनों ही गहरे दर्द और अकेलेपन की दास्तां कह रहे हैं ... बहुत ही लाजवाब ... उम्दा ...

shikha varshney ने कहा…

धुआँ पहन चली गयी,
'शमा' एक जली हुई,
होके बेहद अकेली,
जब बनी ज़िंदगी पहेली
वो राह ,वो सहेली...
बेहद खूबसूरत बयानगी है. सच है वक्त गुजर जाता है और उसके साथ बहुत कुछ पीछे छूट जाता है. रह जाता है तो बस एहसास और कुछ यादें.

शारदा अरोरा ने कहा…

कृति बहुत सुन्दर है ...भीतर का दर्द भी फूट-फूट पड़ रहा है ..

Kailash Sharma ने कहा…

ये कारवाँ उसका नही,
कोई उसका अपना नही,
अनजान बस्ती,बूटा पत्ती,
बिछड़ गयी कबकी,
वो राह,वो सहेली...

...बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...बहुत मर्मस्पर्शी..

Murari Pareek ने कहा…

धुआँ पहन चली गयी,
'शमा' एक जली हुई,
होके बेहद अकेली,

ऐसे लाजवाब शब्द कैसे जुड़ जाते है ..सचमुच बहुत सार है ऐसा जैसे समुद्र को इकठा करके बूंद बना दिया हो....

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(29-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

kavita verma ने कहा…

gujare vakt ki khoobsurat yadon ko yad karte akelepan ke dard ko bakhoobi ubhara hai ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

राह के उस पार कितना कुछ छोड़ आया है जीवन..

संजय भास्‍कर ने कहा…

ये कारवाँ उसका नही,
कोई उसका अपना नही,
..... बहुत ही लाजवाब ... उम्दा

arvind mishra ने कहा…

एकला चलो रे !

Madan Mohan Saxena ने कहा…

वाह.सुन्दर भावपूर्ण .बहुत बहुत बधाई...

आशा जोगळेकर ने कहा…

आपकी सबसे खूबसूरत सहेलियां है ापकी कला और आपकी कलम ।