गुरुवार, 5 सितंबर 2013

वो वक़्त भी कैसा था


10 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जितना सुन्दर चित्र बुना, उतनी ही सुन्दर कविता भी बुनी।

Saras ने कहा…

यादें...जीवन का एक अहम् हिस्सा .....इतना ....कि उनके बगैर ...जीना भूल जायें ....वाकई ...!!!!

arvind mishra ने कहा…

वियोग की रेशमी सिहरन

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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गुरूजनों को नमन करते हुए..शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ।
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (06-09-2013) के सुबह सुबह तुम जागती हो: चर्चा मंच 1361 ....शुक्रवारीय अंक.... में मयंक का कोना पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

smt. Ajit Gupta ने कहा…

अच्‍छी रचना।

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

कृपया आप यहाँ भी पधारें और अपने विचार रखे धर्म गुरुओं का अधर्म की ओर कदम ..... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः13

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यादों के झरोखे से ...रेशमी एहसास

Kailash Sharma ने कहा…

आज भी सुबह आसमाँ सुनहरा,
कुछ,कुछ रंगीन होता होगा,
जिसे अकेले देखा नही जाता....

...वाह! बहुत भावपूर्ण रचना...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

वक्त की कद्र शायद गुजर जाने के बाद ही होती है।

mridula pradhan ने कहा…

chitr aur kavita donon hi lajabab.....