शनिवार, 24 अक्तूबर 2009

soonee galee kaa mod....

रुको ,मै  अभी  आया ,
कह के जानेवाला,
कभी नही लौटा,
ना कहता तो सब्र होता,
सूनी गली के मोडको,
या द्वार के चौखट को,
परछाई या आहट को,
बैठे, बैठे,मन ना तकता..

7 टिप्‍पणियां:

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

सच है. यदि कोई आशा दे जाये तो मन सालों-साल इन्तज़ार में ही गुज़ार दे...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

लम्बे गीतों से सुन्दर हैं,
छंद के दो चार बन्द!
बहुत बढ़िया!

Dipak 'Mashal' ने कहा…

Bahut umda, lajawab... kam shabdon me bahut kuchh kah dala..

Jai Hind

लता 'हया' ने कहा…

shukria;
simte lamhe acche lage.

ज्योति सिंह ने कहा…

aas ka bandhan na hota ,bekal man phir na hota .sahi farmaya aapne ,bahut khoob .

lifes' like this.. never fair never right ने कहा…

वास्तव में हर इन्तेजार के पीछे बस आस होती है कि शायद कोई आएगा

Jogi ने कहा…

amazing lines ...