मंगलवार, 9 मार्च 2010

मेरे घरमे भूत है..

"मेरे घरमे भूत है," ये अल्फाज़ मेरे कानपे टकराए...! बोल रही थी मेरी कामवाली बाई...शादीका घर था...कुछ दिनों के लिए मेरे पडोसन की बर्तनवाली,मेरे घर काम कर जाती...मेरी अपनी बाई, जेनी, कुछ ही महीनों से मेरे यहाँ कामपे लगी थी...उसी पड़ोस वाली महिला से बतिया रही थी......
एक बेटीकी माँ, लेकिन विधवा हो गयी थी। ससुराल गोआमे था..मायका कर्नाटक मे...एक बेहेन गोआमे रहती थी...इसलिए अपनी बेटीको पढ़ाई के लिए गोआ मे ही छोड़ रखा था...

मै रसोईको लगी बालकनी मे कपड़े सुखा रही थी...ये अल्फाज़ सुने तो मै, हैरान होके, रसोई मे आ गयी...और जेनी से पूछा," क्या बात करती है तू? तूने देखा है क्या?"

"हाँ फिर!" उसने जवाब मे कहा...

"कहाँ देखा है?" मैंने औरभी चकरा के पूछा !

"अरे बाबा, पेडपे लटकता है..!"जेनी ने हाथ हिला, हिला के मुझे बताया...!

"पेडपे? तूने देखा है या औरभी किसीने?"मै।

जेनी :" अरे बाबा सबको दिखता है...सबके घर लटकता है...! पर तू मेरेको ऐसा कायको देखती? तू कभी गयी है क्या गोआ?"

जेनी हर किसीको "तू" संबोधन ही लगाया करती..."आप" जैसा संबोधन उसके शब्दकोशमे तबतक मौजूद ही नही था.....!
मै:" हाँ, मै जा चुकी हूँ गोआ....लेकिन मुझे तो किसीने नही बताया!"

जेनी :" तो उसमे क्या बतानेका? सबको दिखता है...ऐसा लटका रहता है...." अबतक, मेरे सवालालों की बौछार से जेनी भी कुछ परेशान-सी हो गयी थी..

मै:" किस समय लटकता है? रातमे? और तुझे डर नही लगता ?" मेरी हैरानी कम नही हुई थी...वैसे इतनी डरपोक जेनी, लेकिन भूत के बारेमे बड़े इत्मीनान से बात कर रही थी..जैसे इसका कोई क़रीबी सबंधी, रिश्तेदार हो!

"अरे बाबा...! दिन रात लटकता रहता है...पर तू मेरे को ऐसा क्यों देख रही है? और क्यों पूछ रही है...?ये इससे क्या क्या डरने का ....?" कहते हुए उसने अपने हाथ के इशारे से, हमारे समंदर किनारेके घरसे आए, नारियल के बड़े-से गुच्छे की और निर्देश किया!
जेनी:"मै बोलती, ये मेरे घरमे भूत है...और तू पूछती, इससे डरती क्या??? तू मेरेको पागल बना देगी बाबा..."

अब बात मेरी समझमे आयी.....! जेनी "बहुत" का उच्चारण "भूत" कर रही थी !!!

उन्हीं दिनों मेरी जेठानी जी भी आयी हुई थीं..और ख़ास उत्तर की संस्कृति....! उन्हें जेनी का "तू" संबोधन क़तई अच्छा नही लगता था....!देहली मे ये सब बातें बेहद मायने रखतीं हैं...!
एक दिन खानेके मेज़पे बैठे, बैठे, बड़ी भाभी, जेनी को समझाने लगीं....किसे, किस तरह संबोधित करना चाहिए...बात करनेका सलीका कैसा होना चाहिए..बड़ों को आदरवाचक संबोधन से ही संबोधित करना चाहिए...आदि, आदि...मै चुपचाप सुन रही थी...जेनी ने पूरी बात सुनके जवाबमे कहा," अच्छा...अबी से ( वो 'भ"का भी उच्चारण सही नही कर पाती थी) , मै तेरे को "आप" बोलेगी.."

भाभी ने हँसते, हँसते सर पीट लिया....!
जेठजी, जो अपनी पत्नीकी बातें खामोशीसे सुन रहे थे,बोल उठे," लो, और सिखाओ...! क्या तुमभी...१० दिनों के लिए आयी हो, और उसे दुनियाँ भर की तेहज़ीब सिखाने चली हो!!!!"

14 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बेहतरीन। लाजवाब।

Apanatva ने कहा…

nice post. rochak.

बूझो तो जानें ने कहा…

Rochak lekh.
Shuru me to maine socha ki sach ka bhoot hai par aage padne ke baad apni hansi rok nahi saka.

DHANYAWAAD.

बेचैन आत्मा ने कहा…

भूत अच्छा लगा मेरे को .

JHAROKHA ने कहा…

puribaat padhe padhe jab aakhiri ki laino tak phunchi to hasate hansate lot pot ho gayi maza aagyyy-------------
poonam

BrijmohanShrivastava ने कहा…

हर जगह की बोली ,बात करने का लहजा आलग अलग होता है | मै तेरे को आप बोलेगी पर बहुत हंसी आई | मुझे तो पहला पद पढ़ते ही याद आया
भूत के बच्चे ने भूत से कहा
पापा मैंने आदमी देखा है
भूत ने कहा आदमी वगैरा कुछ नहीं होता है
यह तो तेरा वहम है

anil gupta ने कहा…

bahut khobu. maza agaya.

Noyanika ने कहा…

apni baat kehne ka tareeka achcha hai, par bahut rochak hai, aisa main keh nahin sakti.

शहरोज़ ने कहा…

बढया प्रस्तुति.भाव और विचार से सराबोर.

ज्योति सिंह ने कहा…

shabdo ke her fer se baate kya se kya ho jaati hai ,aur kabhi kisi ke liye hansi to kisi ke liye narajagi ka samaan hoti hai .rochak lagi post .mahila divas ki badhai .

सतीश सक्सेना ने कहा…

अच्छी लेखन शैली और अलग अंदाज़ ! आप कामयाब हैं , शुभकामनायें !

डॉ टी एस दराल ने कहा…

दिलचस्प वाकया ।
मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया ।
कृपया २२ फरवरी को मेरे ब्लॉग --अंतर्मंथन पर लिखे चित्रमयी लेख को भी पढ़ें , आपको अच्छा लगेगा।

parveen kumar snehi ने कहा…

ek naya anubhav diya hai aapne.
blog par saraahna ke liye dhanyvaad.
maine likhna shuru hi kiya hai, so aapke anmol sujhaavon v margdarshan ki sada pratiksha rhegi.
'snehi' parveen kumar

ROHIT SHARMA ने कहा…

SANTOR NIWASI
KAHANI MAST H