गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

चश्मे नम मेरे....










परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,

कि इन्हें, लमहा, लमहा,

रुला रहा है कोई.....



चाहूँ थमना चलते, चलते,

क़दम बढ्तेही जा रहें हैं,

सदाएँ दे रहा है कोई.....




अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई......





18 टिप्‍पणियां:

shikha varshney ने कहा…

परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,

कि इन्हें, लमहा, लमहा,

रुला रहा है कोई..

ओह गज़ब की कशिश है ...बहुत खूब.

sagebob ने कहा…

परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,

कि इन्हें, लमहा, लमहा,

रुला रहा है कोई.....

बहुत खूब.
सलाम

Dr Varsha Singh ने कहा…

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई......

बहुत सुन्दर कविता लिखी है आपने...
आपकी लेखनी को नमन .

ehsas ने कहा…

जबरदस्त नज्म लिखी है आपने। सीधे दिल में उतर गई। आभार।

वन्दना ने कहा…

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,

तेरीही चाँदनी बरसाके,

बरसों, जला रहा कोई......

ओह! दर्द ही दर्द भरा है……………सुन्दर प्रस्तुति।

संतोष कुमार ने कहा…

परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,

कि इन्हें, लमहा, लमहा,

रुला रहा है कोई.....

वाह क्या बात है बहुत खूबसूरत एहसास !
आभार !!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

क्या बात है...

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता लिखी है आपने...

Dorothy ने कहा…

खूबसूरत अहसासों को पिरोती हुई एक सुंदर भावप्रवण रचना. आभार.
सादर,
डोरोथी.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया क्षमा जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

सुंदर भावों के साथ अच्छी कविता लिखी है आपने
अए चांद सुन !
तेरी ही चांदनी बरसा'के बरसों,
जला रहा है कोई… … …

बधाई !

बसंत पंचमी सहित बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार

Arvind Mishra ने कहा…

यह तो आजीवन है शाश्वत है अपना साथी है

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

राही मनवा
दुःख की चिंता क्यूँ सताती है,
दुःख तो अपना साथी है!!
लेकिन फिर भी आपको ये बिल्कुल सूट नहीं करता!! इस बार आपकी कलाकृति की जगह ख़ाली देखकर कुछ सूना सूना लगा!!

abhi ने कहा…

:)

Dimps ने कहा…

Hello ji,

I had been away & wasn't blogging :)
So sorry couldn't catch up with your blog :)

As usual, very beautifully written...
Perfect words and great thoughts make it a good composition once again.

Regards,
Dimple

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

जीवन चलने का नाम


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अंतरिक्ष में वैलेंटाइन डे।
अंधविश्‍वास:महिलाएं बदनाम क्‍यों हैं?

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,

कि इन्हें, लमहा, लमहा,

रुला रहा है कोई..

shabd shabd dil se ubhare bhawon ka
darpan hai .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,
तेरीही चाँदनी बरसाके,
बरसों, जला रहा कोई...

ये इश्क वालों की अदा है ..

विवेक Call me Vish !! ने कहा…

bahut dino baad ...pad paya thada vyast tha !! hamesha ki tarah sundar abhiwyakti !!

Jai Ho mangalmay ho