गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

बुलबुल का घोंसला...!




इस बोनसाय के पेड़ के साथ बडीही मधुर यादगार जुडी हुई है....इस बात को शायद १० साल हो गए...एक दिन सुबह मै अपने इन "बच्चों" के पास आयी तो देखा, इस पेड़ पे बुलबुल घोंसला बना रही थी...!कितने विश्वास के साथ....! इस पँछी का ऐसा विश्वास देख, मेरी आँख नम हो आयी...मैंने रात दिन कड़ी निगरानी राखी...जब तक उस बुलबुल ने अंडे देके बच्चे नही निकाले, मैंने इस पेड़ को बिल्लियों और कव्वों से महफूज़ रखा...!
इस परिंदे ने एक बार नही दो बार इसपे अपने घोंसले बनाये...! परिंदे तो उड़ गए, घोंसले यादगार की तौरपे मेरे पास हैं! इसी पेड़ पे रखे हुए नज़र आते हैं, गर गौरसे देखा जाय तो...! लेकिन उन घोंसलों की अलग से एक तस्वीर कभी ना कभी ज़रूर पोस्ट करूँगी...!

इस पोस्ट को नाम देने का दिल करता है सो ये," मेरे घर आना ज़िंदगी..!".....कई बार आना ज़िंदगी....मेरे अपने पँछी तो उड़ गए...दूर, दूर घोंसले बना लिए...लेकिन परिंदों, तुम आते रहना .....अपने घोंसले बनाते रहना...वादा रहा...इन्हें मेरे जीते जी, महफूज़ रखूँगी...!

16 टिप्‍पणियां:

Apanatva ने कहा…

dil ko choo jane walee rachana.
Hamare ghar ke ek aam ke ped par ek war nahee kai var chidiyan ne ghosala banaya ande bhee diye par kouve maharaj humse jyada furteele aur tej nikale .dukh aaj tak hai.....kitnee koshish kee thee maine ghosale ko chipane kee ...........baad me to mai kouve ko C I D I NSPECTOR KAHANE LAGEE THEE ............

देवेश प्रताप ने कहा…

वाह भावनाओं के साथ ...इस लेख कि प्रस्तुति बहुत खूब ..
''टहनियों पर याद का एक सिलसिला रह जायेगा
लौट जायंगे परिंदे घोसला रह जायेगा ......''

कमलेश वर्मा ने कहा…

sunder man se nikle bhav...sunder rchna...

boletobindas ने कहा…

वाह क्या बात है....अतिथियों के आने की कोई तिथी नहीं होती...काफी दिन बाद आया आपके पोस्ट पर. कई सारी कविताएं छंद एक साथ पड़ लिये.....

तुम्हारा इंतजार है..
मेरे घर आना..

दरअसल आपके दुसरे ब्ल़ॉग पर दर्द का डेरा है..इसिलिए हिम्मत नहीं होती थी...पढ़ते-पढ़ते कहीं कहीं मन और मस्तिषक पर लगता की कोई चोट पड़ रही है..या कोई छुपा दर्द बाहर आ रहा है....खैर इस पर अक्सर आउंगा....

Apanatva ने कहा…

Happy holi.......

अरूण साथी ने कहा…

काफी उत्प्रेरक और जगृत करने वाला...

ktheLeo ने कहा…

आप को भी ’होली’ की शुभकामनाए!"सच में" पर आप के आने के धन्यवाद!

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

...बहुत सुन्दर... होली की हार्दिक शुभकामनाएं !!

ज्योति सिंह ने कहा…

aapke komal man ka parichay deti hui ye post ,man bheeg gaya mamta ke ahsaas se ,kitni daya hai aapke man me .

बूझो तो जानें ने कहा…

नमस्कार,
यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी.

होली मुबारक.

सतीश सक्सेना ने कहा…

खूबसूरत प्रस्तुति के लिए शुभकामनायें !

योगेश स्वप्न ने कहा…

hriday sparshi bhavnaon ke sath ek sunder prastuti.

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

kshama jee ,
चिड़ियों के माध्यम से आप ने बहुत गहरी बात कह दी
सच है ऐसा विश्वास अब शायद परिन्दों
और जानवरों की ही विशेषता रह गई है
भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति के लिये बधाई .

prkant ने कहा…

ham chizon ko apne man ke mutabik karne ki kitni koshish karte hain.pedon ke vikas ko bhi niyantrit kar bonzai bana diya.

गर्दूं-गाफिल ने कहा…

शमाजी
बड़े दिनों के बाद मिली फुर्सत तो मुखतिब हुआ हूँ
कई दिनों से आपकी खैरो खबर भी नहीं मिली
रचना अच्छी है

खुलते है आसमान कई गर दम परों में हो
आप भी कुछ लाजवाब ब्लागरों में हो


रंग लेकर के आई है तुम्हारे द्वार पर टोली
उमंगें ले हवाओं में खड़ी है सामने होली

निकलो बाहं फैलाये अंक में प्रीत को भर लो
हारने दिल खड़े है हम जीत को आज तुम वर लो
मधुर उल्लास की थिरकन में आके शामिल हो जाओ
लिए शुभ कामना आयी है देखो द्वार पर होली

Arvind Mishra ने कहा…

भाग्यशाली हैं आप -कलंगी वाली बुलबुलें( रेड व्हिस्कर्ड बुलबुल ) इतनी निचाई के पौधों पर घोसले बना देती हैं -मगर कोई डिस्टर्ब कर दे तो फिर उड़ भी जाती हैं घोसले नहीं बनाती -आप ममतामयी के यहाँ इन्होने पुरसकून घोसले का निर्माणकिया