सोमवार, 5 जुलाई 2010

बातों ही बातों में

बहुत-सी बातें थीं ,बातों में उनकी,
वो बात नही थी,जो तुम्हारी  बातों में थी,
बातों ही बातों में नाराज़ करना,
बातों ही बातों में मना लेना,
बातों ही बातों में रूठ जाना,
बातों ही बातों में मान  जाना
यह तिलिस्म,यह बात जो तुम में थी,
वो बात,वो कशिश उनमे कहाँ थी?

25 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बस यह कशिश ही तो जान लेती है ..:):)

बहुत खूबसूरती से बयां किया

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

इस पर तो बस एक ही प्रतिक्रिया दी जा सकती है... क्या बात है!!

सतीश सक्सेना ने कहा…

आज तो चाँद बातों में ही कमाल की बातें की हैं !

Arvind Mishra ने कहा…

बातो ही बातों में आपने एक छुपी बात कह दी ..बढियां !

Apanatva ने कहा…

jo dil ko bhae usake aage to fir koi tik hee nahee sakta jee........

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

आज आपने भी थोड़े शब्दों में बहुत कुछ कह दिया.
मन को छू गयी ये चार लाईने

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना!

पश्यंती शुक्ला. ने कहा…

nice.

arvind ने कहा…

baato hi baton me aapne kaafi damadaar baat kah di...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

हम जिसे खास समझते हैं, उसकी किसी बात पर हम मर-मिटते हैं ...
यह चाहने वाले की नज़र है, यह चाहत कि कशिश है ...

आचार्य उदय ने कहा…

भावपूर्ण लेखन।

ज्योति सिंह ने कहा…

बहुत-सी बातें थीं ,बातों में उनकी,
वो बात नही थी,जो तुम्हारी बातों में थी,
बातों ही बातों में नाराज़ करना,
बातों ही बातों में मना लेना,
बातों ही बातों में रूठ जाना,
बातों ही बातों में मान जाना
यह तिलिस्म,यह बात जो तुम में थी,
वो बात,वो कशिश उनमे कहाँ थी?
baton ka to asar kafi hota ,umda

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

यह तिलिस्म,यह बात जो तुम में थी,
वो बात,वो कशिश उनमे कहाँ थी?
वाह्! बहुत खूब....

अरूण साथी ने कहा…

दिल का हल

राकेश कौशिक ने कहा…

जज्वातों का ये रंग भी दिखाया - बहुत खूब - आभार

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बातों ही बातों में खूब बात कह दी.

Vivek VK Jain ने कहा…

kabhi kabhi chand panktiya bahut kuch kahne me saksham hoti h.
aapki kavita me vo baat h.
sirf do shabd- 'kya baat, kya baat'.

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

बहुत-सी बातें थीं ,बातों में उनकी,
वो बात नही थी,जो तुम्हारी बातों में थी,

...क्षमा जी!...यह कविता दिल पर गहरी छाप छोड गई है!...धन्यवाद!

ज्योत्स्ना पाण्डेय ने कहा…

बैटन ही बातों में कुछ अपनी कह जाना, ये तिलस्म तो है आपमें....
बहुत अच्छा लगा आपका इसतरह बात कहना .......

शुभकामनाएं....

Vivek Jain ने कहा…

good,

vivj2000.blogspot.com

dipayan ने कहा…

bahut khoob.. sundar rachna..kuch hi shabd lekar aapne ek sundar mala piro dali..

abhi ने कहा…

bilkul sahi....baat jo tum mein thi wo unme kahan? :)

Dimps ने कहा…

Hello :)

" यह तिलिस्म,यह बात जो तुम में थी,
वो बात,वो कशिश उनमे कहाँ थी? "

Nice way to project those deep questions in the form of poetry!

Regards,
Dimple

संजय भास्कर ने कहा…

bahar hone ke wajah se blogjagat se door raha.....

संजय भास्कर ने कहा…

हर बार की तरह शानदार प्रस्तुति