रविवार, 11 जुलाई 2010

लुटेरे


हर बार लुट ने से पहेले सोंचा
अब लुट ने के लिए क्या है बचा?
कहीँ से खज़ाने निकलते गए !
मैं लुटाती रही ,लुटेरे लूट ते गए!
हैरान हूँ ,ये सब कैसे कब हुआ?
कहाँ थे मेरे होश जब ये हुआ?
अब कोई सुनवायी नही,
गरीबन !तेरे पास था क्या,
जो कहती है लूटा गया,
कहके ज़माना चल दिया !
मैं ठगी-सी रह गयी,
लुटेरा आगे निकल गया...

27 टिप्‍पणियां:

Jandunia ने कहा…

शानदार पोस्ट

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

यह सवाल हर युग में, हर समाज में, हर अदालत में पूछा जाता रहा है... और गरीबन लुटती रही है... किसी भी सभ्यता को शर्म्सार करने के लिए यथेष्ट प्रश्न...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत उहापोह की सी स्थिति की बात कही है...
मन के द्वंद को दर्शाती अभिव्यक्ति..

sanu shukla ने कहा…

बहुत सुन्दर...

Udan Tashtari ने कहा…

मार्मिक!

Manish ने कहा…

गरीब !तेरे पास था क्या
जो कहता है लूटा गया

ये मेरे लिए उपयुक्त है :( :(

Dimps ने कहा…

Hello ji,

"मैं ठगी-सी रह गयी,
लुटेरा आगे निकल गया... "

It has such deep meaning. I loved the composition...

"हैरान हूँ ,ये सब कैसे कब हुआ?"

This line hits the core of the heart...
Very nice!

Regards,
Dimple

देवेश प्रताप ने कहा…

वाह !! एक अलग अंदाज़ कि रचना ......बहुत खूब

वन्दना ने कहा…

गरीबन !तेरे पास था क्या,
जो कहती है लूटा गया,
कहके ज़माना चल दिया !
मैं ठगी-सी रह गयी,
लुटेरा आगे निकल गया...
हकीकत और दर्द दोनो उभर आये है।

निर्मला कपिला ने कहा…

मन की टीस --- हाँ लुट जाने के बाद ही अदमी के मन से ऐसी आवाज आती है। शुभकामनायें

दिगम्बर नासवा ने कहा…

लगातार लुटने की त्रासदी ... बहुत मार्मिक ...

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

.....मैं ठगी-सी रह गयी,
लुटेरा आगे निकल गया...
............
शानदार...बहुत शानदार

Apanatva ने कहा…

MARMIK AUR DIL PAR CHAO CHOD JANE WALE BHAV LIYE GAMBHEER KAVITA.........BAHUT VEDNA SIMAT AAEE HAI BHAVO ME VISMAY KE SATH.......

kumar zahid ने कहा…

गरीबन !तेरे पास था क्या,


दुनिया के पास अमीरी गरीबी के अपने मापदंड होते है,
यह तो दिल है जो जानता है कि हमारी दौलत क्या है..

लुटने की पीड़ा का त्रासद चित्रण

संजय भास्कर ने कहा…

सोचने को मजबूर करती है आपकी यह रचना ! सादर !

M VERMA ने कहा…

अंतर्द्वन्द के इर्द गिर्द सुन्दर रचना

शोभना चौरे ने कहा…

achhi rachna

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

शानदार रचना !

अनिल कान्त : ने कहा…

bahut dinon baad aapke blog par aakar kuchh padha...achchha laga

boletobindas ने कहा…

जो कहती है लूटा गया,
कहके ज़माना चल दिया !

सही लिखा है आपने। एक लाइन कई बातें कह रही हैं। जमाना तो हमेशा से ही ताने देना जानता है।

Vinay Prajapati 'Nazar' ने कहा…

बहुत सुन्दर कल्पना

अरुणेश मिश्र ने कहा…

वाह ! शानदार प्रस्तुति ।

mridula pradhan ने कहा…

bahut sunder kavita.

anjana ने कहा…

मार्मिक रचना |

विवेक Call me Vish !! ने कहा…

wahh wahhh aapke pass bahut kuch dene ko ....hum to hi rah gaye......


Jai Ho Mangalmay ho

विवेक Call me Vish !! ने कहा…

wahh wahhh aapke pass bahut kuch dene ko ....hum to hi rah gaye......


Jai Ho Mangalmay ho

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

बहुत दिन हुए अब तो आगे लिखो ऊऊऊऊऊऊऊऊओ