शुक्रवार, 7 मई 2010

ये मौसम सुहाने .

 सावन  के  झरने ,
बहारों के साए,
पतझड़  के  पत्ते
मिले हैं आके यहाँ पे..

हम रहे न रहें,
किया है क़ैद इन्हें
तुम्हारे लिए,
ये अब जा न पायें..

भूल जाना दर्द सारे,
जो गर मैंने दिए,
साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने..

17 टिप्‍पणियां:

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

वाह!! वाह!!क्या तोहफा दिया है, दर्द को भूलने का... बहुत सुंदर.

संजय @ मो सम कौन... ने कहा…

सुहाने मौसम? आज के जमाने में?
खैर, दिल के बहलाने को ख्याल अच्छे हैं, पर आमीन तो कहना ही चाहिये।
आमीन।

हर्षिता ने कहा…

बहुत खूब।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

ये भी क्या खूब तोहफा है!

nilesh mathur ने कहा…

भूल जाना दर्द सारे,
जो गर मैंने दिए,
साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने..
वाह! क्या बात है !

संजय भास्‍कर ने कहा…

बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक...

संजय भास्‍कर ने कहा…

सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है और चित्रकारी भी !
दर्द भूलने को ये तोहफा काफी है
आपने दिया यह दवा काफी है !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना और चित्र...

vandan gupta ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर भाव भर दिये हैं।

Apanatva ने कहा…

ati sunder........

Ra ने कहा…

सुन्दर और मनमोहक ...प्रस्तुति ....बहुत खूब

http://athaah.blogspot.com/

Sulabh Jaiswal "सुलभ" ने कहा…

ये मौसम का जादू है मितवा...बरबस याद गए.

साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने...

जी कोशिश करेंगे.

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

अनुभूति के धरातल पर आपको
सुन्दर काव्य रचना के लिए बधाई!
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व्यवहार और यथार्थ के धरातल पर
मनोविज्ञान कुछ और कहता है-
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हमें जिंदा रखती हमारी हरारत ।
मोहब्बत है पूजा, नहीं ये तिजारत ।।
भली हैं बुरी है हुईं दर्ज जो भी-
भुलाए न भूलें दिलों की इबारत ।
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
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Tej ने कहा…

भूल जाना दर्द सारे,
जो गर मैंने दिए,
साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने..

aachi sonch

Amrendra Nath Tripathi ने कहा…

भूल जाना दर्द सारे,
जो गर मैंने दिए,
साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने.
-------- बाद में ये मौसम सौत - सा व्यवहार करते हैं
और व्याज सहित वसूलते हैं !

ज्योति सिंह ने कहा…

भूल जाना दर्द सारे,
जो गर मैंने दिए,
साथ रखना अपने,
ये मौसम सुहाने..
bahut hi sundar panktiyaan .